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न जाने क्यों


Sandeep Mishra


Electrical Engineer,

Gold Medalist,

Senior Executive,

Poet, Tabla Enthusiast.

न जाने क्यों


न जाने वक्त की कोख में क्या छिपा है

आगे क्या होगा , किसी को भी नहीं पता है।


न जाने क्यों आदमी भाग रहा है,दौलत के वास्ते

साथ न ले जा पायेगा,यह भी उसे पता है ।

 

न जाने क्यों ,लोग आपस में मिलते‌ नहीं

कल कोई रहे या ना रहे ,यह किसको पता है।

 

न जाने क्यों लोग करते हैं ईर्ष्या दूसरों से

जितना नसीब में है वही मिलेगा, सबको पता है।

 

न जाने क्यों लोग खोज रहें सुख भौतिक संसार में

सुकून तो मन के अंदर है, सबको पता है।

 

संदीप

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