न जाने क्यों
- Sandeep Mishra

- 20 hours ago
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Sandeep Mishra
Electrical Engineer,
Gold Medalist,
Senior Executive,
Poet, Tabla Enthusiast.
न जाने क्यों
न जाने वक्त की कोख में क्या छिपा है
आगे क्या होगा , किसी को भी नहीं पता है।
न जाने क्यों आदमी भाग रहा है,दौलत के वास्ते
साथ न ले जा पायेगा,यह भी उसे पता है ।
न जाने क्यों ,लोग आपस में मिलते नहीं
कल कोई रहे या ना रहे ,यह किसको पता है।
न जाने क्यों लोग करते हैं ईर्ष्या दूसरों से
जितना नसीब में है वही मिलेगा, सबको पता है।
न जाने क्यों लोग खोज रहें सुख भौतिक संसार में
सुकून तो मन के अंदर है, सबको पता है।
संदीप

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