मोबाइल की लत


Sandeep Mishra
Electrical Engineer,
Gold Medalist,
Senior Executive,
Poet, Tabla Enthusiast.
मोबाइल की लत
लोग मोबाइल पर इस कदर लगे हैं रात और दिन
जीवन लगता है अधूरा अब मोबाइल के बिन ।
आंख गड़ाए चलते हैं ,नहीं देखते हैं इधर उधर
चाहे कुछ भी हो रहा हो , मोबाइल से हटती नहीं नजर।
घर में सब बैठे हैं, नहीं होती है आपस में बात
कम्युनिकेशन होता नहीं ,अब बिगड़ गये हैं हालात।
बच्चे हों या बूढ़े, सबको लगी है मोबाइल की लत
मोबाइल न मिलने पर बच्चे करते हैं हठ।
कंप्यूटर, टीवी, कैमरा आदि ,खोलता नहीं कोई अब
मोबाइल में ही मिल जाते हैं ,यह फीचर्स सब ।
गरीब हो या अमीर आज मोबाइल है सबके पास
मोबाइल से होने लगे हैं ,हर ट्रांसेक्शन आज।
जिस तरह टेक्नोलॉजी का हो रहा है विकास
मोबाइल का महत्व जीवन में हो गया है खास।
न जाने यह मोबाइल छूटेगा कब
हम सब को लग चुकी है मोबाइल की लत
संदीप मिश्रा।


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