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मातृ दिवस

Sandeep Mishra


Electrical Engineer,

Gold Medalist,

Senior Executive,

Poet, Tabla Enthusiast.


मां की छवि जो मन में थी बसी 

समय के साथ वह बदलते दिखी।

पहले मां एक गृह लक्ष्मी का रोल थी निभाती

आज वह दुर्गा सरस्वती और लक्ष्मी तीनों रूप में है विराजती ।

 

मां अब घर की सीमा में नहीं है बंधी

घर चलाने में भी पिता के साथ है खड़ी

वह कितनी भी वयस्त क्यों न हो

अपने बच्चों की शिक्षा है उसके लिए सर्वोपरि।

 

बाहर की विषम परिस्थियों से वह दुर्गा की तरह है लड़ती,

बच्चों की सुरक्षा में वह ढाल बनकर होती है खड़ी।

इस मां के बदलते रुप को है मेरा सलाम

मां के रुप में ही मिलते हैं हमको चारो धाम ।

 

संदीप मिश्रा

१२/५/२४

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